अब लोग महंगाई से तो परेशान थे ही रोज रोज होने वाले बंद ने उनकी परेशानी कुछ ज्यादा ही बढ़ा दी है। प्रदर्शन के इस तरीके से लोगों का भला हो नहीं हो, महंगाई का जरूर भला होगा। जिसके विरोध में आये दिन बंद और प्रदर्शन हो रहे हैं, इस कदम से "उसमे" और एक्रीमेंट ही हो रहा है। बंद का आयोजन गरीब जनता कि "भलाई" के लिए किया गया, पर जिनके इशारों या लीडरशिप में बंद होता है, वो रात दिन हवादार गाड़ियों में घुमते हैं, ऐसी गाड़ियाँ जिसमे बैठकर आपको पता भी नहीं चलेगा कि गर्मी का मौसम है। ये लोग आमलोगों के उस दर्द को क्या जाने, जब बंद के कारण गाडी नहीं मिलने पर ये घंटो धुप में खड़े रहते हैं। सुबह-सुबह घर से खाना-पीना खाकर बंद करने वालों को उनका दर्द भी नहीं दीखता है, जिन्हें बंद के कारण भूखे रहना पड़ता है। बंद करने वालों को को इसकी फिकर थोड़े ही रहती है, इन्हें बस बंद को इसलिए सफल बनाना है कि आमलोगों से सरकार तक को लगे कि इनकी ताकत बहुत है। महंगाई के खिलाफ इस बंद से किसका भला होगा, उसका जिसने घर पहुचने के लिए १० के बदले २५ रुपये खर्च किये या उसका जिसे सुबह का खाना भी नसीब नहीं हुआ, मेरी नज़र में उसका भी भला नहीं हुआ होगा जिसका रोज के 10-२0 रुपये के बिजनेस से खुद का और पुरे परिवार का पेट भरता है, शायद उसका भी नहीं जिसका एक दिन का स्कूल या कोचिंग छूट गया...! तो फिर इस महंगाई के खिलार बंद का लाभ किसे मिलेगा, पार्टी के दिन रात एक कर काम करने वाले कार्यकर्ता को और पार्टी के महामहिम नेता जी को जो ये दिखाना चाहते हैं की जनता उनके साथ है। अब भले ही जनता डर के मारे उनका साथ क्यू न दे, पर साथ है तो साथ है।
आज के बंद की एक और ख़ास बात ये रही की जिनके लीडरशिप में बंद का आयोजन किया गया, दोनों रेलवे मिनिस्टर रह चुके हैं। और ये शायद बताने की बात नहीं है की बंद का असर सबसे ज्यादा रेलवे पर ही पड़ता है। जहा मन हुआ ट्रेन रोक दिया, जहा मन हुआ ट्रैक उखाड़ फेंका, कोई पूछने वाला थोड़े ही है, सरकार की संपत्ति मतलब अपनी जायदाद।
बहरहाल इस बंद से, न तो रामविलास जी कोई फर्क पड़ेगा और न ही लालू जी को। उनके घर महंगाई का असर न तो पहले था और न ही अब ही होगा। और तो और बंद करने वाले हजारो कार्यकर्तायों को भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जिसने अच्छी भीड़ जुटी होगी, उसकी इज्जत नेता जी के सामने और ज्यादा बढ़ गयी होगी। असर तो उनको पड़ा जिसकी कोचिंग छूट गयी, जिसका २० के बदले ६० खर्च करना पड़ा, दवा नहीं milne के कारन जिसका ऑपरेशन नहीं हो सका, जो टाइम पर अपने घर नहीं पहुच सका, टाइम पर खाना नहीं खा सका, जिसकी कमाई चौपट हो गयी। ये तो एक दो एग्जाम्पल दे रहे हैं, ऐसे कितने लोग होंगे, जिनके काम को इस बंद ने और भी महंगा कर दिया......! अब आप बताइए बंद महँगा हुआ या महंगाई......!
आज के बंद की एक और ख़ास बात ये रही की जिनके लीडरशिप में बंद का आयोजन किया गया, दोनों रेलवे मिनिस्टर रह चुके हैं। और ये शायद बताने की बात नहीं है की बंद का असर सबसे ज्यादा रेलवे पर ही पड़ता है। जहा मन हुआ ट्रेन रोक दिया, जहा मन हुआ ट्रैक उखाड़ फेंका, कोई पूछने वाला थोड़े ही है, सरकार की संपत्ति मतलब अपनी जायदाद।
बहरहाल इस बंद से, न तो रामविलास जी कोई फर्क पड़ेगा और न ही लालू जी को। उनके घर महंगाई का असर न तो पहले था और न ही अब ही होगा। और तो और बंद करने वाले हजारो कार्यकर्तायों को भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जिसने अच्छी भीड़ जुटी होगी, उसकी इज्जत नेता जी के सामने और ज्यादा बढ़ गयी होगी। असर तो उनको पड़ा जिसकी कोचिंग छूट गयी, जिसका २० के बदले ६० खर्च करना पड़ा, दवा नहीं milne के कारन जिसका ऑपरेशन नहीं हो सका, जो टाइम पर अपने घर नहीं पहुच सका, टाइम पर खाना नहीं खा सका, जिसकी कमाई चौपट हो गयी। ये तो एक दो एग्जाम्पल दे रहे हैं, ऐसे कितने लोग होंगे, जिनके काम को इस बंद ने और भी महंगा कर दिया......! अब आप बताइए बंद महँगा हुआ या महंगाई......!

