Wednesday, February 1, 2017

अब बासंती हो चला है वैलेंटाइंस का रंग

''मेरे प्यार की वो हद पूछते हैं कि दिल में हैं कितनी जगह पूछते हैं
चाहते हैं हम उन्हीं को क्यों इतना, इसकी भी वो वजह पूछते हैं.
भूलना चाहोगे तो भी याद हमारी आएगी, दिल की गहराइयों में तस्वीर हमारी बस जाएगी,
बनाने चलोगे हमसे बेहतर दोस्त, तलाश हमसे शुरू और हम पर ही खत्म हो जाएगी.''


महीना फरवरी का है, मतलब प्यार का है. बासंती रंग की खुमारी का है. प्यार के परवान में खिले फूल को जी भर दीदार करने का है. फरवरी शुरू होते ही युवाओं के दिलों की धड़कने बढ़ने लगती है. युवाओं के लिए फरवरी माह प्यार का इजहार करने का माह माना जाता है. ठंड की नरमी, वसंत ऋतु में खिले फूलों की खुशबू, मौसम की रवानी और फाल्गुन में मदमस्त कर देने वाला फरवरी माह प्रकृति और सुंदरता के कद्रदानों के लिए सुकून वाला होता है.
हालांकि आज एक फरवरी है. बसंत पंचमी धूमधाम से मनाया जाता है, पर कहीं न कहीं मां शारदे के इस पर्व पर प्यार की खुमारी भारी पड़ती जा रही है. बात दो साल पहले की है. मुझे केरला जाना था, तो पटना से कोलकाता फ्लाइट ली थी, उसके बाद हमें नेक्स्ट डे केरला के लिए उड़ान भरनी थी. संयोगवश उस दिन बसंत पंचमी था. हम जब कैब से एयरपोर्ट की तरफ जा रहे थे, तो रास्ते में हमें हर तरफ सजी-संवरी लड़कियां दिख रही थीं. पीली साड़ी में इन लड़कियों को देख लग रहा था, जैसे बसंत न हो, वैलेंटाइंस डे आ गया हो. हालांकि कोलकाता में सरस्वती पूजा धूमधाम से मनायी जाती है, पर कहीं न कहीं इस पूजा पर वैलेंटाइन की खुमारी दिख रही थी. लड़कियां अपने ब्वॉफ्रेंड के साथ मंदिर या किसी पार्क में अपनी फरवरी मना रही थीं. कमोवेश यही स्थिति हर जगह दिखती है.
मुझे लगता है अब सरस्वती पूजा को लोग वैलेंटाइंस डे का पूरक बना दिये हैं. मतलब ठेठ अंदाज में प्यार का पर्व मनाने का सिलसिला शुरू हो चला है. मेरी इस सोच पर बहुतों को प्रॉब्लम हो सकती है, पर कहीं न कहीं वे भी ऐसा जरूर फील कर रहे होंगे. आज भी पटना में हमें कई जगह लड़कियां दिखीं, जो अपने प्रियतम के साथ अपनी फरवरी सेलिब्रेट करती दिखीं.

प्यार को सेलिब्रेट करने के हसीन दिन
7 फरवरी - यह दिन गुलाब दिवस के रूप में मनाया जाता है.
8 फरवरी - प्रपोज डे के दिन प्यार के कद्रदान अपने चाहने वालों को प्यार का इजहार करते हैं.
9 फरवरी - इसे चॉकलेट दिवस के रूप में मनाते हैं. इस दिन प्यार से किसी को चॉकलेट देकर संबंधों में मिठास भरी जा सकती है.
10 फरवरी - यह टेडी डे होता है, जिसमें टेडी टॉयज देने के बहाने भी प्यार का इजहार हो सकता है.
11 फरवरी - सच्चे प्रेमी प्रोमिस डे पर एक-दूसरे से प्यार निभाने का वायदा करते हैं.
12 फरवरी - किस डे है. इस दिन सच्चे प्रेमी-प्रेमिका किस के जरिए प्यार की कसमें खाते हैं.
13 फरवरी - आलिंगन दिवस यानी 'हग डे' पर प्यार के राही एक-दूसरे के गले लगकर आलिंगनबद्घ होते हैं.
14 फरवरी - संत वेलेंटाइन के नाम पर है. प्यार करने वालों के लिए यह दिन बेहद खास होता है.
15 फरवरी - इस दिन जरा संभल कर रहें, क्योंकि स्लैप डे है.
16 फरवरी - इस दिन को किक डे के रूप में मनाया जाएगा. किसी को प्यार से किक कर सकते हैं.
17 फरवरी - परफ्यूम डे है, इस दिन फूलों और इत्र भेंट कर प्यार की सच्ची सुगंध का मजा लें.
18 फरवरी - फ्लर्टिंग डे है. प्यार के साथ फ्लर्ट करने का मजा ले सकते हैं.
19 फरवरी - कन्फेशन डे है यानी कि इस दिन आप अपने प्रियतम के प्रस्ताव या गलती को कंफेस कर सकते हैं.
20 फरवरी - मिसिंग डे. प्यार करने वाले इस दिन अपनों की कमी महसूस करेंगे.

Tuesday, January 31, 2017

तेरी खूबसूरती के दीवाने क्या हुए, दुनियावालों ने तो खिलजी बना दिया

खूबसूरती पर फिदा होना हम इंसान की फितरत है...
इतिहास में झांककर देखें, पता चलता है कि मलिक मुहम्‍मद जायसी ने 1540 ईस्‍वी के आसपास महाकाव्‍य 'पद्मावत' लिखा था. उस कृति के मुताबिक रानी पद्मावती, चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह की पत्‍नी थीं. उस कहानी में बताया गया है कि रानी पद्मावती अप्रतिम सौंदर्य की मलिका थीं. दिल्‍ली का शासक अलाउद्दीन खिलजी उन पर आसक्‍त था. पद्मावती को पाने के लिए उसने 1303 में चित्‍तौड़ पर हमला कर दिया और राजपूतों की उस युद्ध में हार हुई. खिलजी जब महल पहुंचा तो उसने देखा कि रानी पद्मावती समेत राजपूत महिलाओं ने जौहर कर लिया था. जौहर मध्‍ययुग में एक ऐसी प्रथा थी जब राजपूत राजाओं के युद्ध में मारे जाने के बाद उनकी रानियां दुश्‍मन के चंगुल से बचने के लिए सामूहिक रूप से आत्‍मदाह कर लेती थीं. हालांकि इसकी प्रामाणिकता को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं. कई इतिहासकारों का मानना है कि पद्मावती नाम का कोई किरदार इतिहास में नहीं था. उनके मुताबिक पद्मावती केवल एक साहित्यिक किरदार थी और वह ऐतिहासिक किरदार नहीं थी. ये इतिहासकार कहते हैं कि अलाउद्दीन के जमाने में इस तरह के किसी किरदार का जिक्र नहीं मिलता. वे मानते हैं कि चारण परंपरा, लोक कथाओं, वाचक परंपरा और जनश्रुति के चलते यह किरदार सदियों से जीवित है.
खूबसूरती को निहारना, उसका दीदार करना, उससे बेइंतिहां मोहब्बत करना, उस पर फिदा होना हम इंसान की फितरत है. मोहब्बत करने वाले हर जमाने में होते रहे हैं, हर धर्म के किस्सों में होते रहे हैं. संजय लीला भंसाली की अपकमिंग फिल्म पद्मावती की शूटिंग के दौरान जो हादसा हुआ, उसके बाद तो खूबसूरती के चर्चे जैसे आम हो गये. क्या आपको पता है इस कहानी में खिलजी और रानी पद्मावती के बीच आखिर प्यार जैसी कोई चीज थी भी या नहीं. खिलजी सच में पद्मावती को चाहता था, इसके कई प्रमाण हैं, पर इन दोनों के बीच मोहब्बत के दृश्य दिखाकर संजय लीला भंसाली ने ऐतिहासिक आग लगायी है, जिसका हर्जाना उन्हें भुगतना पड़ सकता है.