जिंदगी की 'असल' कहानी लिखो...
रिजल्ट अच्छा हो या बुरा, अच्छा ही होता है. माक्र्स, परसेंट या ग्रेड किसी के टैलेंट को मापने का ऑथेंटिक जरिया नहीं है. कितने ही ऐसे स्टूडेंट हैं, जो सेकेंड, थर्ड डिवीजनर होते हुए अपनी लाइफ में इतना अचीव किया, जितना उनके बैच के टॉपर ने भी नहीं किया. मतलब, रिजल्ट को एंज्वॉय कीजिए. टॉपर की लिस्ट में शामिल हों, तो एक दिन फूलप्रुफ मस्ती कीजिए. कम माक्र्स आए, तो गोलगप्पे खाकर आगे कुछ अच्छा करने का मन बनाइए. आज बिहार इंटरमीडिएट साइंस का रिजल्ट आया, 'जबर्दस्त' बच्चे फस्र्ट डिवीजनर्स बने. अब सीबीएसई टेंथ व ट्वेल्थ का रिजल्ट आना बाकी है. बिहार बोर्ड मैट्रिक का तो अभी बहुत टाइम है.सो, रिजल्ट एंज्वॉय कीजिए. फ्री टाइम में जी भर सोइए और फिर रिजल्ट बाद किसी भी कॉलेज में एडमिशन लेकर हरफनमौला की तरह सिलेबस को रगड़ दीजिए. सफलता आपके कदम चूमेगी.
ऐसे भी पढऩे-लिखने की कोई उम्र नहीं होती और सक्सेस पाने का कोई फिक्स टाइम नहीं. दिल में अगर कुछ करने का जज्बा हो तो आप कोई भी एग्जाम चुटकियों में क्रैक कर सकते हैं. कई ऐसी शख्सियत हैं, जो पिछली बेंच पर बैठने के बाद भी लाइफ में आगे की कुर्सी पर बैठे. पढ़ाई में गैप करने के बाद भी टॉपर बने. तो, दोस्तों आप भी पास-फेल की किचकिच को अपने दिल से निकाल दीजिए. बस, दिल लगाकर पढ़ाई कीजिए और अपना सपना पूरा कीजिए... :)
