खूबसूरती पर फिदा होना हम इंसान की फितरत है...इतिहास में झांककर देखें, पता चलता है कि मलिक मुहम्मद जायसी ने 1540 ईस्वी के आसपास महाकाव्य 'पद्मावत' लिखा था. उस कृति के मुताबिक रानी पद्मावती, चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह की पत्नी थीं. उस कहानी में बताया गया है कि रानी पद्मावती अप्रतिम सौंदर्य की मलिका थीं. दिल्ली का शासक अलाउद्दीन खिलजी उन पर आसक्त था. पद्मावती को पाने के लिए उसने 1303 में चित्तौड़ पर हमला कर दिया और राजपूतों की उस युद्ध में हार हुई. खिलजी जब महल पहुंचा तो उसने देखा कि रानी पद्मावती समेत राजपूत महिलाओं ने जौहर कर लिया था. जौहर मध्ययुग में एक ऐसी प्रथा थी जब राजपूत राजाओं के युद्ध में मारे जाने के बाद उनकी रानियां दुश्मन के चंगुल से बचने के लिए सामूहिक रूप से आत्मदाह कर लेती थीं. हालांकि इसकी प्रामाणिकता को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं. कई इतिहासकारों का मानना है कि पद्मावती नाम का कोई किरदार इतिहास में नहीं था. उनके मुताबिक पद्मावती केवल एक साहित्यिक किरदार थी और वह ऐतिहासिक किरदार नहीं थी. ये इतिहासकार कहते हैं कि अलाउद्दीन के जमाने में इस तरह के किसी किरदार का जिक्र नहीं मिलता. वे मानते हैं कि चारण परंपरा, लोक कथाओं, वाचक परंपरा और जनश्रुति के चलते यह किरदार सदियों से जीवित है.
खूबसूरती को निहारना, उसका दीदार करना, उससे बेइंतिहां मोहब्बत करना, उस पर फिदा होना हम इंसान की फितरत है. मोहब्बत करने वाले हर जमाने में होते रहे हैं, हर धर्म के किस्सों में होते रहे हैं. संजय लीला भंसाली की अपकमिंग फिल्म पद्मावती की शूटिंग के दौरान जो हादसा हुआ, उसके बाद तो खूबसूरती के चर्चे जैसे आम हो गये. क्या आपको पता है इस कहानी में खिलजी और रानी पद्मावती के बीच आखिर प्यार जैसी कोई चीज थी भी या नहीं. खिलजी सच में पद्मावती को चाहता था, इसके कई प्रमाण हैं, पर इन दोनों के बीच मोहब्बत के दृश्य दिखाकर संजय लीला भंसाली ने ऐतिहासिक आग लगायी है, जिसका हर्जाना उन्हें भुगतना पड़ सकता है.
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