Friday, August 25, 2017

पता नहीं था मैं एक एक्टर-डायरेक्टर नहीं, बलात्कारी बाबा का इंटरव्यू कर रहा हूँ!

बात इस साल की शुरुआत की है. बाबा गुरमीत राम रहीम की एक फ़िल्म आयी थी Hind Ka Napak Ko Jawab - MSG Lion Heart 2. फ़िल्म को लेकर बाबा का फोनिंग इंटरव्यू कर रहे थे. इधर से मेरे "नमस्ते सर" के जवाब में उनके "खुश रहो बच्चा, खूब खुश रहो" सुनकर थोड़ा अजीब लगा. हम फ़िल्म के डायरेक्टर, एक्टर का इंटरव्यू कर रहे थे, न कि बाबा का. पर, उन्होंने मुझे भी अपना भक्त ही समझा. खैर, बाबा थे, वो भी राम-रहीम वाले, तो लगा चलो मुफ्त का आशीर्वाद लेने में बुरा क्या है. लगभग आधे घंटे बात हुई और इस दौरान उन्होंने अपनी और अपने बेटी की खूब तारीफ की (उनकी बेटी भी फ़िल्म में थी). देश-दुनिया, इंसानियत और अपनी देशभक्ति फ़िल्म की जमकर डींगे हाँके. और फिर फ़ोन रखते-रखते दो-चार बार आशीर्वाद फिर से दे ही दिए.
अब जब राम-रहीम का नाम बदनाम कर एक्टर बाबा बलात्कारी घोषित हो चुका है, तब लगता है कि अपने चेलों और फॉलोवर्स के साथ भी एक्टिंग ही करता होगा. बेवजह दो-चार आशीर्वाद हम भी खा लिए थे.

Wednesday, February 1, 2017

अब बासंती हो चला है वैलेंटाइंस का रंग

''मेरे प्यार की वो हद पूछते हैं कि दिल में हैं कितनी जगह पूछते हैं
चाहते हैं हम उन्हीं को क्यों इतना, इसकी भी वो वजह पूछते हैं.
भूलना चाहोगे तो भी याद हमारी आएगी, दिल की गहराइयों में तस्वीर हमारी बस जाएगी,
बनाने चलोगे हमसे बेहतर दोस्त, तलाश हमसे शुरू और हम पर ही खत्म हो जाएगी.''


महीना फरवरी का है, मतलब प्यार का है. बासंती रंग की खुमारी का है. प्यार के परवान में खिले फूल को जी भर दीदार करने का है. फरवरी शुरू होते ही युवाओं के दिलों की धड़कने बढ़ने लगती है. युवाओं के लिए फरवरी माह प्यार का इजहार करने का माह माना जाता है. ठंड की नरमी, वसंत ऋतु में खिले फूलों की खुशबू, मौसम की रवानी और फाल्गुन में मदमस्त कर देने वाला फरवरी माह प्रकृति और सुंदरता के कद्रदानों के लिए सुकून वाला होता है.
हालांकि आज एक फरवरी है. बसंत पंचमी धूमधाम से मनाया जाता है, पर कहीं न कहीं मां शारदे के इस पर्व पर प्यार की खुमारी भारी पड़ती जा रही है. बात दो साल पहले की है. मुझे केरला जाना था, तो पटना से कोलकाता फ्लाइट ली थी, उसके बाद हमें नेक्स्ट डे केरला के लिए उड़ान भरनी थी. संयोगवश उस दिन बसंत पंचमी था. हम जब कैब से एयरपोर्ट की तरफ जा रहे थे, तो रास्ते में हमें हर तरफ सजी-संवरी लड़कियां दिख रही थीं. पीली साड़ी में इन लड़कियों को देख लग रहा था, जैसे बसंत न हो, वैलेंटाइंस डे आ गया हो. हालांकि कोलकाता में सरस्वती पूजा धूमधाम से मनायी जाती है, पर कहीं न कहीं इस पूजा पर वैलेंटाइन की खुमारी दिख रही थी. लड़कियां अपने ब्वॉफ्रेंड के साथ मंदिर या किसी पार्क में अपनी फरवरी मना रही थीं. कमोवेश यही स्थिति हर जगह दिखती है.
मुझे लगता है अब सरस्वती पूजा को लोग वैलेंटाइंस डे का पूरक बना दिये हैं. मतलब ठेठ अंदाज में प्यार का पर्व मनाने का सिलसिला शुरू हो चला है. मेरी इस सोच पर बहुतों को प्रॉब्लम हो सकती है, पर कहीं न कहीं वे भी ऐसा जरूर फील कर रहे होंगे. आज भी पटना में हमें कई जगह लड़कियां दिखीं, जो अपने प्रियतम के साथ अपनी फरवरी सेलिब्रेट करती दिखीं.

प्यार को सेलिब्रेट करने के हसीन दिन
7 फरवरी - यह दिन गुलाब दिवस के रूप में मनाया जाता है.
8 फरवरी - प्रपोज डे के दिन प्यार के कद्रदान अपने चाहने वालों को प्यार का इजहार करते हैं.
9 फरवरी - इसे चॉकलेट दिवस के रूप में मनाते हैं. इस दिन प्यार से किसी को चॉकलेट देकर संबंधों में मिठास भरी जा सकती है.
10 फरवरी - यह टेडी डे होता है, जिसमें टेडी टॉयज देने के बहाने भी प्यार का इजहार हो सकता है.
11 फरवरी - सच्चे प्रेमी प्रोमिस डे पर एक-दूसरे से प्यार निभाने का वायदा करते हैं.
12 फरवरी - किस डे है. इस दिन सच्चे प्रेमी-प्रेमिका किस के जरिए प्यार की कसमें खाते हैं.
13 फरवरी - आलिंगन दिवस यानी 'हग डे' पर प्यार के राही एक-दूसरे के गले लगकर आलिंगनबद्घ होते हैं.
14 फरवरी - संत वेलेंटाइन के नाम पर है. प्यार करने वालों के लिए यह दिन बेहद खास होता है.
15 फरवरी - इस दिन जरा संभल कर रहें, क्योंकि स्लैप डे है.
16 फरवरी - इस दिन को किक डे के रूप में मनाया जाएगा. किसी को प्यार से किक कर सकते हैं.
17 फरवरी - परफ्यूम डे है, इस दिन फूलों और इत्र भेंट कर प्यार की सच्ची सुगंध का मजा लें.
18 फरवरी - फ्लर्टिंग डे है. प्यार के साथ फ्लर्ट करने का मजा ले सकते हैं.
19 फरवरी - कन्फेशन डे है यानी कि इस दिन आप अपने प्रियतम के प्रस्ताव या गलती को कंफेस कर सकते हैं.
20 फरवरी - मिसिंग डे. प्यार करने वाले इस दिन अपनों की कमी महसूस करेंगे.

Tuesday, January 31, 2017

तेरी खूबसूरती के दीवाने क्या हुए, दुनियावालों ने तो खिलजी बना दिया

खूबसूरती पर फिदा होना हम इंसान की फितरत है...
इतिहास में झांककर देखें, पता चलता है कि मलिक मुहम्‍मद जायसी ने 1540 ईस्‍वी के आसपास महाकाव्‍य 'पद्मावत' लिखा था. उस कृति के मुताबिक रानी पद्मावती, चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह की पत्‍नी थीं. उस कहानी में बताया गया है कि रानी पद्मावती अप्रतिम सौंदर्य की मलिका थीं. दिल्‍ली का शासक अलाउद्दीन खिलजी उन पर आसक्‍त था. पद्मावती को पाने के लिए उसने 1303 में चित्‍तौड़ पर हमला कर दिया और राजपूतों की उस युद्ध में हार हुई. खिलजी जब महल पहुंचा तो उसने देखा कि रानी पद्मावती समेत राजपूत महिलाओं ने जौहर कर लिया था. जौहर मध्‍ययुग में एक ऐसी प्रथा थी जब राजपूत राजाओं के युद्ध में मारे जाने के बाद उनकी रानियां दुश्‍मन के चंगुल से बचने के लिए सामूहिक रूप से आत्‍मदाह कर लेती थीं. हालांकि इसकी प्रामाणिकता को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं. कई इतिहासकारों का मानना है कि पद्मावती नाम का कोई किरदार इतिहास में नहीं था. उनके मुताबिक पद्मावती केवल एक साहित्यिक किरदार थी और वह ऐतिहासिक किरदार नहीं थी. ये इतिहासकार कहते हैं कि अलाउद्दीन के जमाने में इस तरह के किसी किरदार का जिक्र नहीं मिलता. वे मानते हैं कि चारण परंपरा, लोक कथाओं, वाचक परंपरा और जनश्रुति के चलते यह किरदार सदियों से जीवित है.
खूबसूरती को निहारना, उसका दीदार करना, उससे बेइंतिहां मोहब्बत करना, उस पर फिदा होना हम इंसान की फितरत है. मोहब्बत करने वाले हर जमाने में होते रहे हैं, हर धर्म के किस्सों में होते रहे हैं. संजय लीला भंसाली की अपकमिंग फिल्म पद्मावती की शूटिंग के दौरान जो हादसा हुआ, उसके बाद तो खूबसूरती के चर्चे जैसे आम हो गये. क्या आपको पता है इस कहानी में खिलजी और रानी पद्मावती के बीच आखिर प्यार जैसी कोई चीज थी भी या नहीं. खिलजी सच में पद्मावती को चाहता था, इसके कई प्रमाण हैं, पर इन दोनों के बीच मोहब्बत के दृश्य दिखाकर संजय लीला भंसाली ने ऐतिहासिक आग लगायी है, जिसका हर्जाना उन्हें भुगतना पड़ सकता है.

Tuesday, January 24, 2017

पेन ड्राइव और कॉफी मग के लिए लड़ने वाले पत्रकार भी ट्रंप को गरिया रहे हैं!

उस दिन मैं एक प्रोडक्ट की लांचिंग को कवर करने के लिए शहर के एक होटल में गया था. वहां जाते ही सज-धजकर तैयार हॉल में बैठने काे कहा गया और बिसलेरी के छोटकु बोटल में पानी के साथ कोल्ड ड्रिंक्स का ग्लास थमा दिया गया. इस दौरान लगभग सारे अखबार और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार बंधु आ गये थे. प्रेस को ब्रीफ करने कंपनी की एक आला ऑफिसर कोलकाता से आयी थीं, जिन्होंने चंद लम्हों बाद ब्रीफिंग शुरू कर दी. इस दौरान चाय-कॉफी और नाश्ते संग कुर-कुर-मुर-मुर चलता रहा. खैर, लगभग आधे घंटे की ब्रीफिंग के बाद लंच टाइम हुआ और पत्रकार भाई हमेशा की तरह प्लेट लिये गरमा-गरम चिकेन-मटन पर टूट पड़े. मैं लंच से दूर रहा, क्याेंकि मैं ऐसे प्रोग्राम में खाने से थोड़ा हिचकता था या यूं कहें शरमाता था. ठांसू लंच के बाद जाते टाइम जिस-जिस ने पेपर पर अपना नाम और मीडिया हाउस का नाम लिखा था, उन्हें एक पैक बंद टाइटन की एक घड़ी दी गयी. मैंने यह लेना
दो दिन पहले ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया को बेईमान बताते हुए एक टीवी पत्रकार को घटिया कह दिया था. ट्रंप ने न्यूयॉर्क में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रेस पर मेरा हमला जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि हमें अखबारों ने निंदात्मक खबरें पढ़ने को मिलती हैं, जिनके बारे में हमें पता है कि ये झूठी हैं. मैं प्रेस को बेहद बेईमान पाता हूं. मैं राजनीतिक प्रेस को अविश्वसनीय रूप से बेईमान पाता हूं. बताया जा रहा है कि जनवरी में आयोवा में सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए एक रात में 60 लाख डॉलर का कोष जुटाये जाने के सवाल पर ट्रंप ने मीडिया पर यह हमला बोला. ट्रंप ने कहा कि प्रेस को शर्मिंदा होना चाहिए. इस तरह का अच्छा काम करने पर मुझे कभी भी इतने बुरे प्रचार का सामना नहीं करना पड़ा. मेरा मानना है कि राजनीतिक प्रेस सर्वाधिक बेईमान लोगों में शामिल है जिससे मैं रूबरू हुआ हूं. उन्होंने एक पत्रकार टॉम लमास का जिक्र करते हुए कहा कि आप घटिया हैं, क्योंकि आप तथ्यों को अच्छी तरह जानते हैं.
मुनासिब नहीं समझा और वापस ऑफिस चला गया. शाम में कंपनी के प्रतिनिधि वो गिफ्ट देने मेरे ऑफिस आये, पर बॉस ने उन्हें झिड़क कर बाहर भेज दिया. ऐसे भी मैं फील्ड में कम ही जाता था, इसलिए ऐसे मौके ज्यादा देखने को नहीं मिलते थे. पर, एक-दो बार ऐसे मौके जरूर आये, जब पेन ड्राइव, कॉफी मग सेट सहित चिंदी-चिंदी गिफ्ट के लिए भी पत्रकारों को इधर-उधर करते देखा है. अब जब टंप ने पत्रकारों को बईमान कहा, तो पूरा कुनबा खड़ा हो गया है. पर, यकीन मानिये पब्लिक को भी पता है कि अखबारों या न्यूज चैनलों में वही खबरें अच्छे से दिखाई या छापी जाती हैं, जिससे मीडिया प्रबंधन को फायदा हो. अगर किसी ने ऐड नहीं दिया और कोई कार्यक्रम करा है, तो विज्ञापन विभाग वाले उसे ब्लैक लिस्ट में डाल देते हैं. रिलेशन पर खबरें छपती और रुकती ही हैं, पर बेईमानी और इधर-उधर की आड़ में पत्रकारिता को जिंदा करने वाले महान जर्नलिस्ट को ट्रंप जैसे लोगों पर इतना गुस्सा आता है, जैसे कि उनकी कोई एक्सक्लूसिव खबर को किसी और ने छाप दिया हो.

Monday, January 23, 2017

मोदी का यह "दो मिनट" खत्म कर देगा "चरखा पुराण"!
चरखा पुराण पर चल रहा विवाद आखिरकार अब खत्म होने वाला है. विपक्षी पार्टियों का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जान-बूझकर महात्मा गांधी काे लोगों की जुबां से हटाकर खुद को रिप्लेस करना चाहते हैं. नोट पर गांधी जी की फोटो खिसकाने की बात पर बवाल खत्म भी नहीं हुआ था कि खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर में गांधी की जगह मोदी को चरखा चलाते दिखाये जाने पर हंगामा खड़ा हो गया है. लोगों ने बवाल मचाया कि यह सब जान-बूझकर किया गया है. पर, पीएम मोदी ने अब एक नया दाव खेला है, जिससे विपक्षी पार्टियों के हंगामे और बवाल, धरे के धरे रह जायेंगे. मोदी ने ऐलान किया है कि हर साल शहीद दिवस पर पूरा देश बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए दो मिनट का मौन रखेगा.
दरअसल, केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी के शहीद दिवस (30 जनवरी) को लेकर एडवाइजरी जारी कर दी है. एडवाइजरी केंद्र सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी वीके राजन की तरफ से जारी की गई है. रेलवे मंत्रालय व रेलवे बोर्ड को भी अपने सभी विभाग को इस दौरान मौन रखने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है. इस दौरान ट्रेनें भी किसी तरह का साइरन नहीं बजाएंगी. 30 जनवरी को सुबह 11 बजे शहीदों की स्मृति में सारे काम रोककर दो मिनट का मौन रखा जाएगा. एडवाइजरी के मुताबिक, यह श्रद्धांजलि केवल सरकारी दफ्तरों में ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक वर्ग में भी हो. एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि लोग अपने-अपने घरों दो मिनट का मौन रखें. इस दिन यह लोगों को बताया जाए कि स्वतंत्रता सेनानियों ने किस तरह से देश की आजादी में अपनी-अपनी भूमिका निभाई है. राज्य सरकार स्कूलों व कॉलेजों में भी इसके लिए निर्देश जारी करें.

Sunday, January 15, 2017

24 घंटे हो गए, जब मैं सो नहीं पाया तो उन 24 घरों के लोग कैसे होंगे?

कल शाम ऑफिस में काम करने के दौरान अचानक मेरे एक कलीग के मोबाइल पर फ़ोन आया कि गंगा पार दियारा से आ रही नाव पलट गयी है, कुछ लोगों की हालत नाज़ुक है. उस वक़्त मैं फोटोज सेलेक्ट कर रहा था, वो फोटो जो मकर संक्रांति के मौके पर बिहार सरकार की ओर से आयोजित पतंग उत्सव में भाग लेने गए लोगों के दिन भर के एन्जॉयमेंट की थी. फोटो देख कर मन में थोड़ी उदासी भी थी कि हर बार की तरह इस बार भी मैं किसी कारणवश वहाँ नहीं जा सका.
खैर, उस कॉल के बाद रिपोर्टर्स ने इधर उधर फ़ोन करना शुरू कर दिया था. कुछ ही देर में पता चल गया था कि हादसा बहुत बड़ा हुआ है. 2 का शव मिलने की खबर से शुरू हुई यह मनहूस कहानी रात होते होते 21 पर जा पहुंची थी. रात को जब ऑफिस से घर आया, तो पता चला मेरे पहचान का एक शख्श भी इस "सरकारी मर्डर" की भेंट चढ़ गया. अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की मौत हो चुकी थी, अभिषेक पटना का होनहार लड़का था. पुराने सिक्कों को जमा करने का शहर का सबसे बड़ा शौक़ीन कलेक्टर था अभिषेक. मैं उसे 6 साल से जानता हूँ, तब मैं आईनेक्स्ट में लगभग कर वीक उसके व्यू पब्लिश करता था. जब छापना बंद कर देता था, तो वह फ़ोन करता था कि भैया इस बार मैंने अच्छा नहीं लिखा था कि आपने नहीं पब्लिश किया. ऐसे मुझे भी उसके व्यू का इंतज़ार रहता था, क्योंकि वो लिखता बहुत अच्छा था. उसका जाना उसके जानने वालों के लिए इतना भयावह था, तो उसके घरवाले कैसे होंगे.
अभिषेक सहित 25 लोगों की मौत की जिम्म्मेवार सीधे सीधे सरकार ही है. इतने वृहत रूप में आयोजन किया गया, लोगों को एन्जॉय करने के लिए बुलाया गया, तो इनलोगों को घर तक सही सलामत पहुँचाना भी आपकी ही जिम्मेवारी में आती है. कुछ दिन पहले ही आयोजित हुए प्रकाश पर्व में लाखों लोग आये थे, जिनकी खातिरदारी में कोई कसर नहीं छोड़ी गयी थी. शायद उस पर्व में बिहार सरकार की धूम देश विदेश में फैलनी थी, एक धर्म विशेष के लोगों के बीच सरकार की बेहतरीन छवि बनानी थी. और ऐसा हुआ भी, नीतीश बाबू की धूम मच गयी. पर ये रहा अपने घर का पर्व, यहाँ कुछ कमी भी हो जाये तो कोई बोलने वाला नहीं. अफ़सोस तब होता है, जब पटना में फेस्टिवल के दौरान लगातार हादसे होते रहे हैं. छठ पूजा हो या दशहरा, दर्जनों लोगों की जानें जा चुकी हैं, पर सरकार को भूत याद नहीं रहता, वो सिर्फ वर्तमान देखती है, अपना भविष्य देखती है.
काश सरकार, आमलोगों का भविष्य भी समझ पाती, अभिषेक जैसे बेगुनाहों की मौतों पर आँसू बहाने के बजाय कुछ इंतेज़ाम कर पाती. आप कुछ करें न करें, कभी ऐसे वृहत आयोजन न कराएं....

Monday, June 6, 2016

 अपनी जिंदगी का यूं कत्लेआम मत कीजिए

लोगों को प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने की आदत हो गयी है. स्वच्छ वातावरण में रहने के बजाय आर्टिफिशियल जिंदगी जीने को लालायित हैं लोग. शहर में हरियाली खत्म हो रही है. सुखाड़ की समस्या बढ़ती जा रही है, फिर भी लोग आदतन अपनी जरूरतों की खातिर खुलेआम पर्यावरण का कत्ल
कर रहे हैं. किसी को सबकुछ पता है, तो कोई अनजाने ही प्रकृति का गला घोंट रहा है. खुली हवा में सांस लेने के बजाय एसी-कूलर की हवा में जिंदगी बिता रहा है. लोगों को शायद इसका अंदाजा नहीं कि जिस हवा में वो अपना जीवन बसर कर रहा है, वही हवा उसकी आने वाली पीढ़ी को बीमार बना देगी, हो सकता है पीढ़ी इस धरती पर आये ही नहीं. ऐसे भी ग्लोबल वार्मिंग की वजह से लोग अब न ही किसी मौसम का मजा ले पाते हैं और न स्वच्छ वातावरण की हवा में सांस ले पाते हैं. इस संबंध में पर्यावरण, जल, मौसम और वन विभाग के कई वरीय अधिकारियों का कहना है कि प्रकृति के साथ हो रहे बदलाव से ही लोगों को स्वच्छ वातावरण नहीं मिल पाता है.
भले ही एजुकेशन सिस्टम बेहतर हुआ है. लोग पढ़ाई और टैलेंट के बल पर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन वे प्रकृति को नहीं समझ पा रहे हैं. यही वजह है कि लोगों के इस बदलाव व व्यवहार की वजह से ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या सामने आ रही है, इसलिए लोगों को समझना चाहिए कि वे कैसे प्रकृति को समझे. पर्यावरण को बचाने के लिए वे प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल ज्यादा करें, ताकि उन्हें स्वच्छ वातावरण मिलेगा. इस बारे में शहर के कई एक्सपर्ट कहते हैं कि इन दिनों लोगों की लाइफ इतनी फास्ट हो गयी है कि वे इको फ्रेंडली नहीं हो पाते हैं. इस जमाने में लोग कृत्रिमता की ओर आगे बढ़ रहे हैं. यही वजह है कि प्रकृति अपना रंग बदल रहा है. इस वजह से तबाही, भूकंप, बारिश और गरमी जैसे समस्यायें सामने आ रही है. इस वजह से हो रही परेशानी
शहर में कई जगह इन दिनों पानी की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है. कुआं, हैंड पंप, गंगा नदी जैसे कई जगहों पर जल स्तर काफी कम हो गया है. नदियां सूखने लगी है. कुएं की पानी गायब हो गया है. हैंड पंप चलाने के बावजूद भी पानी नहीं निकल पा रहा है. हर तरफ सुखाड़ नजर आ रहा है. इस वजह से कई जगहों पर लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पर रहा है. इस बात की जानकारी देते हुए जल विभाग के कई अधिकारियों का कहना है कि पानी प्रकृति की देन है. ऐसे में जल संरक्षण करना भी लोगों का कर्तव्य, ताकि पानी को बचा सके और लोगों की प्यास को बुझा सके.
शहर में सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक की है, जिसमें हर दिन लोग ट्रैफिक में फंसने के साथ-साथ लोगों को पॉल्यूशन का शिकार होना पड़ता है. गाड़ियों से निकलने वाला काला धुआं पूरे पर्यावरण को बिगाड़ देती है, जब एक साथ कई गाड़ियां लगी होती है, तो इंधन से निकलने वाला धुआं लोगों को बीमारी का न्योता देता है. ऐसे में पर्यावरण विभाग के अधिकारियों को कहना है कि पॉल्युशन पर अब कंट्रोल करना बहुत मुश्किल का काम है, क्योंकि हर दिन दूषित वातावरण बढ़ता जा रहा है. इसे बचाने का प्रयास जारी है. टाॅवर के रेडियेशन से भी हो रही दिक्कतइस हाइटेक जमाने में सब कुछ हाइटेक तरीके से हो रहा है. लोग तकनीकी की आड़ में पर्यावरण को बरबाद कर रहे हैं. मोबाइल के इस जमाने में जगह-जगह मोबाइल टाॅवर लगाना ट्रेंड हो गया है. इससे फोन में तो अच्छा नेटवर्क मिल ही जाता है, लेकिन इससे निकलने वाले रेडियेशन बहुत खतरनाक होती है, जो लोगों की जिंदगी पर प्रभाव डालता है. इससे पर्यावरण पर बहुत बूरा प्रभाव परता है.
स्वच्छ वातावरण को कायम रखने के लिए हरियाली जरुरी, ताकि लोग अपनी भाग-दौड़ की जिंदगी में भी हरियाली से अवगत हो सकें. शहर में कई बड़े-बड़े पेड़ हैं, जिसमें सें हर साल पेड़ों की संख्या खत्म होती जा रही है. लोग अपने शौक को पूरा करने के लिए लिए हरे पेड़ को भी काट कर सुखाते हैं. जानकारी के अनुसार एक साल में करीब 10 हजार पेड़ कट चुके हैं. ऐसे मौसम में पेड़ में पानी डालने के बजाय उसे काटते हैं. इससे शहर की हरियाली खत्म होने का डर है. कंक्रीट की सड़कें मानों धरती को कुरेद रही हैं. बेली रोड में तीन हजार पेड़ कट गये. इनमें 316 पुराने पेड़ निर्माण कार्य में काटे गये हैं.

पटना में इस अनुपात में हो रहा पौधारोपण
2016-17 5500 अब तक
2015-16 35000
2014-15 15619
2013-14 28791
2012-13 7300
2011-12 1800