Monday, June 6, 2016

 अपनी जिंदगी का यूं कत्लेआम मत कीजिए

लोगों को प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने की आदत हो गयी है. स्वच्छ वातावरण में रहने के बजाय आर्टिफिशियल जिंदगी जीने को लालायित हैं लोग. शहर में हरियाली खत्म हो रही है. सुखाड़ की समस्या बढ़ती जा रही है, फिर भी लोग आदतन अपनी जरूरतों की खातिर खुलेआम पर्यावरण का कत्ल
कर रहे हैं. किसी को सबकुछ पता है, तो कोई अनजाने ही प्रकृति का गला घोंट रहा है. खुली हवा में सांस लेने के बजाय एसी-कूलर की हवा में जिंदगी बिता रहा है. लोगों को शायद इसका अंदाजा नहीं कि जिस हवा में वो अपना जीवन बसर कर रहा है, वही हवा उसकी आने वाली पीढ़ी को बीमार बना देगी, हो सकता है पीढ़ी इस धरती पर आये ही नहीं. ऐसे भी ग्लोबल वार्मिंग की वजह से लोग अब न ही किसी मौसम का मजा ले पाते हैं और न स्वच्छ वातावरण की हवा में सांस ले पाते हैं. इस संबंध में पर्यावरण, जल, मौसम और वन विभाग के कई वरीय अधिकारियों का कहना है कि प्रकृति के साथ हो रहे बदलाव से ही लोगों को स्वच्छ वातावरण नहीं मिल पाता है.
भले ही एजुकेशन सिस्टम बेहतर हुआ है. लोग पढ़ाई और टैलेंट के बल पर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन वे प्रकृति को नहीं समझ पा रहे हैं. यही वजह है कि लोगों के इस बदलाव व व्यवहार की वजह से ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या सामने आ रही है, इसलिए लोगों को समझना चाहिए कि वे कैसे प्रकृति को समझे. पर्यावरण को बचाने के लिए वे प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल ज्यादा करें, ताकि उन्हें स्वच्छ वातावरण मिलेगा. इस बारे में शहर के कई एक्सपर्ट कहते हैं कि इन दिनों लोगों की लाइफ इतनी फास्ट हो गयी है कि वे इको फ्रेंडली नहीं हो पाते हैं. इस जमाने में लोग कृत्रिमता की ओर आगे बढ़ रहे हैं. यही वजह है कि प्रकृति अपना रंग बदल रहा है. इस वजह से तबाही, भूकंप, बारिश और गरमी जैसे समस्यायें सामने आ रही है. इस वजह से हो रही परेशानी
शहर में कई जगह इन दिनों पानी की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है. कुआं, हैंड पंप, गंगा नदी जैसे कई जगहों पर जल स्तर काफी कम हो गया है. नदियां सूखने लगी है. कुएं की पानी गायब हो गया है. हैंड पंप चलाने के बावजूद भी पानी नहीं निकल पा रहा है. हर तरफ सुखाड़ नजर आ रहा है. इस वजह से कई जगहों पर लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पर रहा है. इस बात की जानकारी देते हुए जल विभाग के कई अधिकारियों का कहना है कि पानी प्रकृति की देन है. ऐसे में जल संरक्षण करना भी लोगों का कर्तव्य, ताकि पानी को बचा सके और लोगों की प्यास को बुझा सके.
शहर में सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक की है, जिसमें हर दिन लोग ट्रैफिक में फंसने के साथ-साथ लोगों को पॉल्यूशन का शिकार होना पड़ता है. गाड़ियों से निकलने वाला काला धुआं पूरे पर्यावरण को बिगाड़ देती है, जब एक साथ कई गाड़ियां लगी होती है, तो इंधन से निकलने वाला धुआं लोगों को बीमारी का न्योता देता है. ऐसे में पर्यावरण विभाग के अधिकारियों को कहना है कि पॉल्युशन पर अब कंट्रोल करना बहुत मुश्किल का काम है, क्योंकि हर दिन दूषित वातावरण बढ़ता जा रहा है. इसे बचाने का प्रयास जारी है. टाॅवर के रेडियेशन से भी हो रही दिक्कतइस हाइटेक जमाने में सब कुछ हाइटेक तरीके से हो रहा है. लोग तकनीकी की आड़ में पर्यावरण को बरबाद कर रहे हैं. मोबाइल के इस जमाने में जगह-जगह मोबाइल टाॅवर लगाना ट्रेंड हो गया है. इससे फोन में तो अच्छा नेटवर्क मिल ही जाता है, लेकिन इससे निकलने वाले रेडियेशन बहुत खतरनाक होती है, जो लोगों की जिंदगी पर प्रभाव डालता है. इससे पर्यावरण पर बहुत बूरा प्रभाव परता है.
स्वच्छ वातावरण को कायम रखने के लिए हरियाली जरुरी, ताकि लोग अपनी भाग-दौड़ की जिंदगी में भी हरियाली से अवगत हो सकें. शहर में कई बड़े-बड़े पेड़ हैं, जिसमें सें हर साल पेड़ों की संख्या खत्म होती जा रही है. लोग अपने शौक को पूरा करने के लिए लिए हरे पेड़ को भी काट कर सुखाते हैं. जानकारी के अनुसार एक साल में करीब 10 हजार पेड़ कट चुके हैं. ऐसे मौसम में पेड़ में पानी डालने के बजाय उसे काटते हैं. इससे शहर की हरियाली खत्म होने का डर है. कंक्रीट की सड़कें मानों धरती को कुरेद रही हैं. बेली रोड में तीन हजार पेड़ कट गये. इनमें 316 पुराने पेड़ निर्माण कार्य में काटे गये हैं.

पटना में इस अनुपात में हो रहा पौधारोपण
2016-17 5500 अब तक
2015-16 35000
2014-15 15619
2013-14 28791
2012-13 7300
2011-12 1800  

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