आखिरकार घर आ गए डॉक्टर दंपति, पर कैसे....?
पिछले छह दिनों से फिल्मी स्टाइल में गायब हुए गया के डॉक्टर दंपति बुधवार को अपने घर गया आ गए. पुलिस प्रशासन के प्रयास के बाद किडनैपर्स के चंगुल से मुक्त डॉ. पंकज कुमार गुप्ता व उनकी पत्नी शुभ्रा गुप्ता मीडिया से रू-ब-रू हुए. डीएम संजय कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में डॉ. गुप्ता दंपती ने जो बात कही. उसके अनुसार किडनैपर्स ने दोनों को डिहरी-आन-सोन स्टेशन के आसपास छोड़ा. उन्होंने बताया कि हालांकि हमें नहीं पता था कि हम वहां पर कैसे आए. आसपास रहे लोगों से पूछने पर पता चला कि पास में ही डिहरी-आन-सोन स्टेशन है. इसके बाद दोनों स्टेशन पहुंचे. पैसे नहीं थे, इसलिए टिकट भी नहीं लिया. एक ट्रेन आई, जो गया की ओर जाने वाली थी. ट्रेन के एसी बोगी में बैठ गए. पास में न तो मोबाइल था. न पैसे. बोगी में अन्य यात्रियों को भी हम नहीं बता सकते थे कि हम दोनों कौन हैं. दोपहर में ट्रेन गया जंक्शन पहुंची. यहां से टेम्पो पकड़ कर यहां आ गए.
पीछे बिठाकर उनलोगों ने पानी पिलाया...
उन्होंने बताया कि जिस दिन दोनों का अपहरण हुआ. हम एक चेक पोस्ट पार कर चुके थे. पीछे से तेजी से आ रही एक फॉरच्यूनर मेरी गाड़ी के सामने कर ओवरटेक किया. पुलिस की वर्दी में रहे चार आदमी वाहन से उतरा और हमारी गाड़ी में लगे शीशे से इशारा कर खिड़की खुलवाया. चालक की सीट पर हम थे. शीशा हटाते ही एक आदमी गाड़ी की चाबी खींच लिया और हमें व पत्नी को पीछे वाले सीट पर बैठा दिया गया. इसके बाद जिसने चाबी छीना. वो ड्राइवर की सीट पर बैठा और तेजी से गाड़ी भगाने लगा. इस बीच, जबरन दोनों को एक बोतल से पानी पिलाया. इसके बाद कुछ होश नहीं रहा. जब आंख खुली तो देखा कि हम दोनों एक अच्छे से कमरे में हैं, जिसमें टीवी व टेलीफोन की सुविधा नहीं थी. जहां हम दोनों को रखा गया, वहां किसी तरह की यातना नहीं दी गई. समय पर चाय, नाश्ता व भोजन भी अच्छा दिया जा रहा था. कहां हम दोनों को ठहराया गया था, जगह या शहर के बारे में जानकारी नहीं.
आपलोगों को छोड़ देंगे
मंगलवार की रात हम दोनों को बताया गया कि आप के चलते पूरा बवाल मचा है. बहुत जल्द ही आपदोनों को छोड़ दिया जाएगा. इसके बाद पता नहीं किस तरह और कब दोनों को उस कमरे से निकाला गया. बुधवार को जब स्वयं को सड़क के आसपास पाया, तो लोगों से पूछने पर पता चला कि डेहरी-आन-सोन स्टेशन पास में ही है. फिरौती की राशि की बात से इंकार कर रहे दोनों का कहना था कि जहां हमें ठहराया गया था, हमारे साथ कोई बदसलूकी नहीं की गई. इज्जत व सम्मान के साथ रखा गया था.
क्या-क्या हुआ...
- किडनैपर्स को पकडऩे के लिए कोई भिखारी, तो कोई बना मेहमान
- पुलिस ने पूर्व में रोहतास से अपहृत व्यवसायी डंपू सिंह का भी लिया सहयोग
- पुलिस की वर्दी पहने बदमाशों ने ऑडी के साथ ही कर लिया था किडनैप
- फॉरच्यूनर पर लखनऊ का नंबर था, जबकि ऑडी की नंबर प्लेट गायब थी
- शारदा अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर-906 था हाई प्रोफाइल किडनैपर्स का ठिकाना
- किडनैपर के पास से चेकोस्लोवाकिया की बनी हुई पिस्टल सीजेड 75, दो पिस्टल 7.62 बोर, बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद
पिछले छह दिनों से फिल्मी स्टाइल में गायब हुए गया के डॉक्टर दंपति बुधवार को अपने घर गया आ गए. पुलिस प्रशासन के प्रयास के बाद किडनैपर्स के चंगुल से मुक्त डॉ. पंकज कुमार गुप्ता व उनकी पत्नी शुभ्रा गुप्ता मीडिया से रू-ब-रू हुए. डीएम संजय कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में डॉ. गुप्ता दंपती ने जो बात कही. उसके अनुसार किडनैपर्स ने दोनों को डिहरी-आन-सोन स्टेशन के आसपास छोड़ा. उन्होंने बताया कि हालांकि हमें नहीं पता था कि हम वहां पर कैसे आए. आसपास रहे लोगों से पूछने पर पता चला कि पास में ही डिहरी-आन-सोन स्टेशन है. इसके बाद दोनों स्टेशन पहुंचे. पैसे नहीं थे, इसलिए टिकट भी नहीं लिया. एक ट्रेन आई, जो गया की ओर जाने वाली थी. ट्रेन के एसी बोगी में बैठ गए. पास में न तो मोबाइल था. न पैसे. बोगी में अन्य यात्रियों को भी हम नहीं बता सकते थे कि हम दोनों कौन हैं. दोपहर में ट्रेन गया जंक्शन पहुंची. यहां से टेम्पो पकड़ कर यहां आ गए.
पीछे बिठाकर उनलोगों ने पानी पिलाया...
उन्होंने बताया कि जिस दिन दोनों का अपहरण हुआ. हम एक चेक पोस्ट पार कर चुके थे. पीछे से तेजी से आ रही एक फॉरच्यूनर मेरी गाड़ी के सामने कर ओवरटेक किया. पुलिस की वर्दी में रहे चार आदमी वाहन से उतरा और हमारी गाड़ी में लगे शीशे से इशारा कर खिड़की खुलवाया. चालक की सीट पर हम थे. शीशा हटाते ही एक आदमी गाड़ी की चाबी खींच लिया और हमें व पत्नी को पीछे वाले सीट पर बैठा दिया गया. इसके बाद जिसने चाबी छीना. वो ड्राइवर की सीट पर बैठा और तेजी से गाड़ी भगाने लगा. इस बीच, जबरन दोनों को एक बोतल से पानी पिलाया. इसके बाद कुछ होश नहीं रहा. जब आंख खुली तो देखा कि हम दोनों एक अच्छे से कमरे में हैं, जिसमें टीवी व टेलीफोन की सुविधा नहीं थी. जहां हम दोनों को रखा गया, वहां किसी तरह की यातना नहीं दी गई. समय पर चाय, नाश्ता व भोजन भी अच्छा दिया जा रहा था. कहां हम दोनों को ठहराया गया था, जगह या शहर के बारे में जानकारी नहीं.
आपलोगों को छोड़ देंगे
मंगलवार की रात हम दोनों को बताया गया कि आप के चलते पूरा बवाल मचा है. बहुत जल्द ही आपदोनों को छोड़ दिया जाएगा. इसके बाद पता नहीं किस तरह और कब दोनों को उस कमरे से निकाला गया. बुधवार को जब स्वयं को सड़क के आसपास पाया, तो लोगों से पूछने पर पता चला कि डेहरी-आन-सोन स्टेशन पास में ही है. फिरौती की राशि की बात से इंकार कर रहे दोनों का कहना था कि जहां हमें ठहराया गया था, हमारे साथ कोई बदसलूकी नहीं की गई. इज्जत व सम्मान के साथ रखा गया था.
क्या-क्या हुआ...
- किडनैपर्स को पकडऩे के लिए कोई भिखारी, तो कोई बना मेहमान
- पुलिस ने पूर्व में रोहतास से अपहृत व्यवसायी डंपू सिंह का भी लिया सहयोग
- पुलिस की वर्दी पहने बदमाशों ने ऑडी के साथ ही कर लिया था किडनैप
- फॉरच्यूनर पर लखनऊ का नंबर था, जबकि ऑडी की नंबर प्लेट गायब थी
- शारदा अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर-906 था हाई प्रोफाइल किडनैपर्स का ठिकाना
- किडनैपर के पास से चेकोस्लोवाकिया की बनी हुई पिस्टल सीजेड 75, दो पिस्टल 7.62 बोर, बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद

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